जेएलएफ- 2017—साहित्य के महाकुंभ का हुआ आगाज

jlf 2017 cm vashundhara rajeजयपुर। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू जग्गी वासुदेव , गुलजार और एन वाल्डमैन की उपस्थित में राजधानी जयपुर में पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव का आगाज हुआ।
गुलाबी नगरी के डिग्गी पैलेस में आयोजित हो रहे महोत्सव के उद्घाटन के बाद सदगुरू से जयपुर साहित्य महोत्सव के निदेशक संजय राय उनकी नवीनतम किताब इनर इंजीनरिंग-ए योगीज गाइड टू जॉय के बारे में चर्चा की और दर्शकों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया।
सतगुरू की नवीनतम पुस्तक का उद्देश्य है कि आनंद आपका हमेशा का साथी बन जाएगा। इसे वास्तविकता बनाने के लिये यह पुस्तक कोई उपदेश नहीं, बल्कि दृष्टि बताती है, कोई शिक्षा नहीं, बल्कि एक तकनीक बताती है, कोई नियम नहीं बल्कि एक मार्ग बताती है। हमारी सारी किताबे प्रेरक है, जबकि यह पुस्तक आपके अंदर रूपांतरण लाएंगी।
उल्लेखनीय है कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 10 साल पूरे हो रहे हैं और इस दौरान यह एक छोटे से विचार से विश्व का सबसे बड़ा नि:शुल्क साहित्योत्सव बन गया। पिछले एक दशक के दौरान यह फेस्टिवल 1300 से अधिक वक्ताओं और 12 लाख से अधिक लोगों की मेजबानी कर चुका है।
थीम- द फ्रीडम टू ड्रीम: इंडिया एट 70: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक चर्चा और सामाजिक संवाद के सफल प्रणेता के तौर पर जेएलएफ । इस वर्ष द फ्रीडम टू ड्रीम की थीम के पर आयोजित हो रहा है। इस के जरिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक का जश्न मनाया जा रहा है। इसके तहत भारत के इतिहास और भविष्य के संदर्भ में आधुनिक भारत के बारे में भी चर्चा की जाएगी।
250 से अधिक लेखक और सेलिब्रेटी: दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजन के रूप में पहचाने जाने वाले इस लिट फेस्ट में इस बार 250 से अधिक लेखक, विचारक, राजनेता, पत्रकार और लोकप्रिय सांस्कृतिक हस्तियां हिस्सा लेंगी। आयोजकों के अनुसार इस बार दर्शकों की संख्या पिछले संस्करण में आए 3,30,000 दर्शकों से बेहद अधिक होगी।
शब्दों, रचनाओं, साहित्य व कला में खोए नजर आए दर्शक: वहीं देशी और विदेशी संस्कृति को अपने दिलों में संजोय हुए दर्शक शब्दों, रचनाओं, साहित्य व कला की इस छठा में बेफिक्री के साथ खोए नजर आए। मेन गेट पर राजस्थानी सजावट, वाद्य यंत्र व नगाड़ों की थाप और इस संस्कृति में संवरी युवतियों की पोशाक ने हर आने वाले का दिल जीत लिया। फेस्टिवल की शुरआत फ्रंट लॉन में शिलॉन्ग चैम्बर काइर के म्यूजिशियन की बेहतरीन स्वरलहरियों के साथ हुई। संगीत की धूनों ने ऐसा समा बांधा कि शब्दों का यह मेला जगमगा उठा। वहीं राजस्थान के नाथूलाल एंड कंपनी ने लोककला गीतों और धूनों की ऐसी जुगत बैठाई कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। तालियों की गडग़ड़ाहट से पूरा फ्रंट लॉन गूंज उठा। वहीं युवा दर्शकों ने सिटी बजाकर इस माहौल का अभिवादन किया।
शब्दों के जादूगर गीतकार गुलजार ने अपने जीवन के अनुभव बांटते हुए कहा कि जयपुर शहर और जयपुर के लोग बहुत खुबसूरत है यहां आकर मन खुश हो जाता है। जब भी मैं बड़ी कुर्सी पर बैठता हूं जब पैर जमीन पर नहीं लगते है तो बहुत डर लगता है। लगता है कि मैं गिरने वाला हूं इसी तरह जब पैन की जमीन को नहीं लगता है तो वह स्याही सोखना बंद कर देता है लिखना बंद कर देता है ऐसे में लिखने के लिए जरूरी है कि इंसान जमीन से जुड़ा रहे।

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