महावीर कैंसर अस्पताल ने सस्ती जमीन ली, लेकिन गरीबों का नहीं किया मुफ्त इलाज—मीना

mahaveer-cancer-hospitalउप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीना ने दी आंदोलन की चेतावनी
जयपुर। सरकार से सस्ती जमीन और अन्य लाभ लेने के बावजूद भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमसीएचआरसी) ने 25 प्रतिशत गरीबों का निशुल्क इलाज नहीं किया। यहां तक कि बीपीएल मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी नहीं दी गईं और अस्पताल से ही उनकी खरीद कराई गई। उप नेता प्रतिपक्ष रमेश मीना ने सरकार पर अस्पताल को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। मीना ने सरकार से अस्पताल का जमीन आवंटन निरस्त करने की मांग की है।
mla ramesh meenaमीना ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि उन्होंने इस बारें में विधानसभा में भी सवाल लगाया था,जिसके उत्तर में बताया गया है कि वर्ष 2008 से 2015 तक किसी भी वर्ष में 25 प्रतिशत बीपीएल मरीजों का निशुल्क इलाज नहीं किया गया। इसके अलावा इसी अस्पताल परिसर में बनाए गए फेपकंवर भवन को केवल चार मंजिल तक बनाया जा सकता था लेकिन इसे छह मंजिल तक बना लिया गया। अब इन दोनों मंजिलों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। अस्पताल को जमीन का आवंटन एक रूपए टोकन मनी पर किया गया है।
मामले के अनुसार जेडीए और चिकित्सा विभाग को बीएमसीएचआरसी हॉस्पिटल की ओर से की जा रही अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। इसके बाद मई माह में दोनों विभागों की ओर से जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी ने हाल ही में सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। अस्पताल की छठी मंजिल पर तो कॉटेज बनाए गए हैं और एक कमरे में दो-दो मरीजों को रखा जा रहा है। एक मरीज से एक दिन के ढाई हजार रुपए तक लिए जा रहे हैं।

यह है रिपोर्ट में
> नगरीय विकास एवं आवासन मंडल की ओर से कम कीमत पर जमीन देने का उदृदेश्य कमजोर और गरीब वर्ग के मरीजों की जांच और उपचार तथा रैफर केस का निशुल्क उपचार था। इसी शर्त पर जमीन दी गई। 25 प्रतिशत बेड ऐसे गरीब तबके के लिए रखे जाने थे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
> जेडीए को सौंपे गए नक्शा अनुमोदन में फेपकंवर भवन चौथी मंजिल तक के लिए स्वीकृत है। जबकि भवन को छह मंजिल तक बना लिया गया।
> वर्ष 2007 को छोड़कर 2015 तक किसी भी वर्ष भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में 25 प्रतिशत गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों का इलाज नहीं किया गया।
> किसी भी बीपीएल मरीज को अस्पताल से निशुल्क दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई।
> यह एक संस्था है और संस्था की ओर से ना लाभ, ना हानि के आधार पर काम करना है। लेकिन अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर से लाभ अर्जित किया जा रहा है। यह नियमों का उल्ल्घंन है।

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