बाड़मेर – भाजपा की स्थिति नाजुक

BJP-logo bjp rajasthanभूरचन्द जैन, स्वतंत्र पत्रकार, बाड़मेर
पश्चिमी राजस्थान का सीमावर्ती थार मरूस्थलीय बाड़मेर जिला लोकतंत्रीय व्यवस्था के आधार पर लोकसभा एवं राजस्थान विधानसभा में चुनाव के समय में बराबर जनप्रतिनिधि भेजकर अपनी भागीदारी निभाता रहा हैं। राजस्थान विधानसभा के लिये बाड़मेर जिले से आरम्भ में सन् 1952 के प्रथम आम चुनाव में 4 सीटें रही। बाद में एक सीट बढ़ने पर सन् 1957 एवं 1962 में पांच सीटें हुई और उसके पश्चात् सन् 1967 से 2003 तक 6 विधानसभा की सीटें रही। इसके बाद विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन होने पर बाड़मेर जिले में एक सीट बढ़ने पर कुल सात विधानसभा क्षेत्र बन गये। सन् 1952 से 2008 तक कुल 13 बार राजस्थान विधानसभा के लिये हुए चुनावों में कुल 75 सीटों पर चुनाव हुए। जिसमें कांग्रेस 42, भाजपा 11, निर्दलीय 8 (जिसमें तीन विद्रोही कांग्रेस) , रामराज्य परिषद 5, जनता पार्टी 3, जनता दल तीन (तीनों ही मूल कांग्रेस दल के थे) जो कांग्रेस विभाजन से अलग हुए। लोकदल 2 (दोनों मूल रूप से कांग्रेसी थे, जो कांग्रेस विभाजन के समय दल बदला) एवं एक स्वतंत्र पार्टी के सदस्य विजयी रहें। यदि राजनैतिक आंकलन किया जाय तो बाड़मेर जिले में कांग्रेस का प्रभुत्वः विधानसभा चुनावों में बराबर बना रहा और इसे चुनाव मैदान में ललकारने के बाद भी भाजपा जिले में अपनी राजनैतिक दुकानदारी जमा नहीं पाई। इसका मूल रहस्य ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा अपनी राजनैतिक जाजम जमा नहीं पाई जबकि कांग्रेस की वर्शों से ग्रामीण क्षेत्रों की पकड़ मजबूत रही।
बाड़मेर जिले में इस बार होने वाला राजस्थान विधानसभा का चैदहवां चुनाव 1 दिसम्बर 2013 को हो रहा है। जिसमें बाड़मेर जिले की शिव (134), बाड़मेर (135), बायतू (136), पचपदरा (137), सिवाना (138), गुड़ामालानी (139) एवं चौहटन सुरक्षित (140) विधानसभा क्षेत्रों के लिये 13, 83, 282 मतदाता 2006 मतदान केन्द्रों पर अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। सन् 2008 के विधानसभा चुनाव में बाड़मेर जिले की 7 में से 6 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा वहां सिवाना पर भाजपा के कानसिंह कोटड़ी कड़े संघर्श में बड़ी मुष्किल से अपनी जीत दर्ज करवा पाये। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की राजनैतिक हालत पतली करने के लिये बहुजन समाज पार्टी, राश्ट्रीय जन पार्टी, जागो पार्टी, कम्यूनिश्ट पार्टी आदि चुनाव दंगल में ताल ठोक कर भाजपा को भी झटका देने में अभी से जन सम्पर्क में जुट जाने के कारण कांग्रेस-भाजपा की राजनैतिक चिन्ताऐं बढ़ गई है। लेकिन कांग्रेस इससे अधिक चिन्तित नहीं है क्योंकि वहां भाजपा जिताऊ उम्मीदवार के लिये राजनैतिक छानबीन करने में लगी हुई है।
बाड़मेर जिले में कांग्रेस की संदेश यात्रा और भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा के साथ राश्ट्रीय जन पार्टी, बहुजन समाज पार्टी आदि राजनैतिक दलों ने मतदाताओं को अपने अपने पक्ष में वातावरण बनाने में जीतोड़ मेहनत की है। जिसमें भाजपा ने तो इस सम्बन्ध में अधिक पसीना इसलिये बहाया कि बाड़मेर जिले के कांग्रेसी गढ़ों को ढाहना हैं। जिसके लिये इस बार भाजपा अधिक राजनैतिक रूप से उत्साही नजर आ रही है वहां कांग्रेसी खेमा जिले की कुछ सीटों पर अपनी शत प्रतिशत जीत को मानते हुए निष्चित होकर गहरी नींद सो रही है। लेकिन जिन सीटों पर कांग्रेस जीत पर निश्चित है वहां उम्मीदवारी को लेकर कांगे्रसियों में आपसी आंतरिक राजनैतिक संघर्ष जोरों पर चल रहा है। यदि कांग्रेस ने जिताऊ उम्मीदवार के स्थान पर राजनैतिक दबाव अथवा भाई भतीजावाद, जातिवाद के आधार पर उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा तो भाजपा उसे मात देना का राजनैतिक अवसर नहीं खोयेगी। भाजपा में भी कांग्रेस के नामीगामी दिखने वाले जिताऊ उम्मीदवारों के सामने अपना सषक्त उम्मीदवार की खोज करने में जुटी हुई है। जो अभी तक मिल नहीं पाये है। ऐसी स्थिति में भाजपा सशक्त उम्मीदवार उतारने में कितनी सफल होती है उस पर जीत के आसार बन सकते है। लेकिन राजनैतिक हालात से ऐसा लगता है कि भाजपा में भी उम्मीदवारी के लिये जातिवाद का संघर्श चल रहा है। यदि यहां भाजपा ने राजनैतिक चूक की तो कांग्रेस को पराजित करना इनके वश की बात नहीं होगी।
कांग्रेस इस बार बाड़मेर जिले की सातों सीटों पर जीत के अपने मुख्यमंत्री अषोक गहलोत सरकार की उपलब्धियों के आधार पर छाती ठोक कर रही है। वहां भाजपा बाड़मेर जिले की सात में से चार सीटों पर कब्जा जमाने की बात करते थक नहीं रही है। भाजपा इस बार जिले के गुड़ामालानी, शिव, सिवाना और पचपदरा पर अपनी जीत के दावे करने के साथ बाड़मेर, चैहटन को भी अपने कब्जे करने के ख्वाब देख रही हैं। वहां बाड़मेर, शिव, गुड़ामालानी, बायतु विधानसभा सीट पर कांगे्रस शत प्रतिशत अपनी जीत को मानकर राजनैतिक चैन की नींद ले रही है। ऐसी राजनैतिक महत्वकांक्षा को देखते भाजपा की स्थिति नाजुक बनती दिखाई दे रही है। भाजपा को राजनैतिक लाभ उस हालत में हो सकता है जब कांग्रेस के गुड़ामालानी, बाड़मेर, शिव, के मौजूदा विधायकों को यदि बदला और पचपदरा, चैहटन में मौजूदा विधायकों को लड़ाया तो कांग्रेस को सम्भवतः चुनावी नुक्षान उठाना पड़ सकता है। सिवाना में यदि कांग्रेस ने जिताऊ उम्मीदवार की उपेक्षा करते हुए राजनैतिक दूरदर्शिता नहीं सोची तो यहां से भाजपा को शिकस्त देना बस की बात नहीं बन पायेंगी। बायतू में कांग्रेस के बहुचर्चित मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कट्टर राजनैतिक विरोधी कर्नल सोनाराम चैधरी को खड़ा नहीं करने का राजनैतिक चक्रव्यूह रचा तो जिले की राजनीति में भंयकर भूचाल आने के साथ कांग्रेस एवं भाजपा के सोचे गये जीत-हार के सभी समीकरण भी बदल सकते है।

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